सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था निधि के अभाव में अटकी


  • सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था निधि के अभाव में अटकी
    सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था निधि के अभाव में अटकी
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नागपुर : महाराष्ट्र के महत्वपूर्ण जेल में उपराजधानी नागपुर की सेंट्रल जेल को भला कौन नहीं जानता जिसकी सुरक्षा व्यवस्था इन दिनों निधि के अभाव में अटकी है। इस जेल में कई खतरनाक कैदियों को रखा जाता है। बता दे की डॉन डैडी यानी अरुण गवली अभी भी इसी जेल में सजा काट रहा हैं। तीन वर्ष पूर्व  दीवार फांदकर 5 खतरनाक कैदी इसी जेल से फरार हो गए थे । जिसके बाद जेल प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का दावा किया था लेकिन इस दावे की कलई जेल का पिछला हिस्सा अब भी खोल रहा है। 6 फीट ऊंची इस जर्जर दीवार को क्रॉस कर दूसरी और मुख्य दीवार तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और जेल ब्रेक की घटना को अंजाम दिया जा सकता है । इस संदर्भ में 36 करोड़ की निधि मुहैया कराने के लिए राज्य के गृह मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई हलचल नहीं हुई है।

पिछले दिनों बिहार में नक्सलियों ने जेल ब्रेक किया था वही तीन साल पहले उपराजधानी नागपुर में जेल ब्रेक की घटना हुई थी। इस दौरान 5 कैदी दीवार फांदकर फरार हो गए थे। इसके बाद जेल की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की बात चली। विदेशी एजेंसी से भी सलाह ली गई। इजराइली जेल के अधिकारियों की सलाह पर जेल की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। करीब 36 करोड़ की निधि को मुहैया कराने के लिए राज्य के गृह मंत्रालय ने कोई पहल नहीं की है। नतीजा लोक निर्माण विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को हरी झंडी नहीं मिली है। इस संबंध में कारागृह महानिदेशक योगेश देसाई और लोकनिर्माण विभाग के बीच कई दौर की बैठक हो चुकी है। निधि के अभाव को देखते हुए अब सुरक्षा दीवार बनाने के बजाय वहां कंटीले तार लगाने के निर्देश कारागृह प्रशासन ने दिए हैं। 

जेल की संवेदनशीलता को देखते हुए जेल की सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत है। इस जेल में कई खूंखार कैदियों को भी रखा गया है। इनके अलावा माफिया डॉन से नेता बने अरुण गवली को भी इस जेल में रखा गया है। इससे ही इस जेल की संवेदनशीलता को समझा जा सकता है। इसके मद्देनजर जेल प्रशासन ने जेल की सुरक्षा को व्यवस्था को मजबूत बनाने का फैसला किया और इसके लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को जिम्मेदारी सौंपी। पीडब्ल्यूडी ने स्थितियों को देखते हुए इस संबंध में एक प्रस्ताव बनाया था। इसके तहत हाइटेक दीवार के अलावा चार सुरक्षा टॉवर बनाए जाने थे जिस पर करीबन 36.40 करोड़ रुपए की लागत आने की संभावना थी। पीडब्ल्यूडी ने इस प्रस्ताव को जेल प्रशासन को सौंप दिया था जिसके बाद जेल प्रशासन ने इसे मंजूरी के लिए राज्य के गृह मंत्रालय के पास भेजा था किन्तु इस प्रस्ताव पर अभी तक कोई भी अमल होने के संकेत दिखाई नहीं दे रहे है I

 



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