रेशमबाग और मानकापुर स्टेडियम के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब


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नागपुर : शहर में सार्वजनिक स्थान मानेजानेवाले रेशिमबाग ग्राउंड और कस्तूरचंद पार्क, मानकापुर स्टेडियम के मुद्दे पर पिछले दिनों से उसका दुरुपयोग होने का मुद्दा गरमाया हुवा है जिसके चलते बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में कस्तूरचंद पार्क के संवर्धन का मुद्दा जनहित याचिका में उठाया गया है। जिसकी बुधवार को इस मामले में सुनवाई हुई । साथ ही न्यायालयीन मित्र एड. श्रीरंग भंडारकर ने कोर्ट को जानकारी दी कि विदर्भ के खिलाड़ियों के लिए बनाया गया मानकापुर इनडोर स्टेडियम और रेशमबाग का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। यहां धड़ल्ले से शादियां और अन्य समारोह हो रहे हैं। ऐसे में निर्धारित प्रारूप से हट कर दोनों स्थलों का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 

बीते शीतसत्र के लिए कस्तूरचंद पार्क को अधिकारियों के वाहनों का पार्किंग स्थल बनाया था। यह मुद्दा भी कोर्ट में उठाया गया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि कस्तूरचंद पार्क (केपी) एक हेरिटेज स्ट्रक्चर है। इस पर पार्किंग करना उचित था या नहीं? बुधवार को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपनी गलती स्वीकार की। राज्य सरकार ने बताया कि अधिवेशन काल में केपी पर बगैर हेरिटेज कमेटी की अनुमति पार्किंग की गई थी। राज्य सरकार भविष्य में इस तरह की गलती नहीं करेगी। सरकार के उत्तर से हाईकोर्ट भी संतुष्ट रहा। इधर मनपा की हेरिटेज कमेटी की ओर से एड. जेमिनी कासट ने भी स्पष्ट किया कि किसी खास कार्यक्रम के लिए केपी पर दो पहिया वाहन पार्क किए जा सकते हैं, मगर चार पहिया वाहन पार्किंग की अनुमति कतई नहीं दी जा सकती। बीते दिनों कस्तूरचंद पार्क पर फैले अतिक्रमण, पार्क की बदहाली और बगैर अनुमति वहां होने वाले आयोजनों की समस्या पर बाम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने स्वयं जनहित याचिका दायर की थी। न्यायालयीन मित्र एड. श्रीरंग भंडारकर ने इस पर याचिका तैयार करके पार्क का व्यवसायिक उपयोग रोकने, पार्क के सौंदर्यीकरण और संरक्षण का मुद्दा उठाया है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि महाराष्ट्र टाउन प्लानिंग एक्ट के मुताबिक सार्वजनिक मैदान का 45 दिन से ज्यादा व्यवसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद कस्तूरचंद पार्क पर वर्ष भर व्यवसायिक आयोजन किए जाते हैं। अब इस याचिका में अन्य स्थलों के दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया गया है। 



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