उपराजधानी में भू-माफियाओं के खिलाफ जांच ठंडे बस्ते में


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नागपुर : उपराजधानी में भू-माफियाओं के खिलाफ होनेवाली जांच अचानक से रोक दी गई है, खासबात यह है की पिछले तीन माह में 923 मामलों में से एक भी मामले का निपटारा नहीं हुआ, जबकि जमीन के खेल में ठगे हुए लोगों को न्याय दिलाने के लिए सरकार ने आनन-फनन में 27 मई 2017 को SIT का गठन किया । SIT ने भू-माफियाओं के खिलाफ 1670 मामलों में एफआईआर दर्ज की और मात्र 6 माह में 700 मामलों का निपटारा भी करवा दिया, यानी प्रत्येक दिन तीन से चार मामलों पर कार्रवाई हुई। इसके बाद अक्टूबर 2017 को SIT रद्द कर दी गई। इस दौरान 970 मामले अनुसुलझे बचे थे। इसमें से 35 मामले शहर के बाहर थे, इसलिए उन्हें बाहर भेज दिया गया, वहीं 12 मामलों को SIT के पास ही छोड़ दिया गया। शेष बचे 923 मामलों को निपटाने के लिए पुलिस को जोन स्तर पर जांच करने को कहा गया। तीन माह बीतने के बाद भी इनमें से एक भी मामले में पुलिस की कार्रवाई नहीं की। हालांकि इसको लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। इसमें सबसे बड़ी चर्चा इस बात कि है सरकार के इशारे पर जांच की गति में ब्रेक लगा दिया गया। हालंकि पुलिस अफसर इससे के लिए अपने अलग तर्क दे रहे हैं।

SIT ने अपने कार्यकाल में सबसे बड़े भू-माफिया दिलीप ग्वालवंशी पर कई मामलों में कार्रवाई की थी यह उनकी बड़ी कार्रवाई थी। हालंकि कई अन्य भू-माफियाओं पर SIT ने शिकंजा भी कसा है। इतना ही नहीं 182.43 एकड़ जमीन भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त करने में भी पुलिस सफल हुई है। इस जमीन पर दोबारा पीड़ितों को कब्जा दिया गया है। इससे सवाल यह उठ रहा है कि SIT में जांच करने वाली शहर पुलिस ही थी और जोन स्तर के प्रकरणों की जांच करने वाली भी शहर पुलिस ही थी। इसके बाद भी जोन स्तर पर पुलिस जमीन से जुड़े प्रकरणों में कोई खास कमाल नहीं कर पाई है। प्रकरणों की जांच नहीं होने के पीछे यह भी तर्क दिया जा रहा है कि जोन स्तर पर काम का अत्याधिक दबाव होने से प्रकरणों की जांच नहीं हो पाई है। SIT के पास शिकायत करने वालों में 35 लोग ऐसे भी थे, जिनका निवास स्थान भले ही नागपुर था, लेकिन भू-माफिया के चंगुल में फंसी उनकी जमीन नागपुर जिले के बाहर की थी। जब SIT का गठन हुआ और भू-माफियाओं पर लगाम कसी जाने लगी थी, तो उन लोगों में भी अपनी जमीन वापस मिलने की उम्मीद जाग उठी थी, जिससे उन्होंने भी SIT में शिकायत की थी, मगर बीच में ही SIT के बंद होने से जिले के बाहर के प्रकरण भी संबंधित थानों को सौंप दिए गए हैं, इससे पीड़ितों की उम्मीद पर पानी फिर गया है। उल्लेखनीय है कि जमीनों से जुड़े सभी मामले SIT के पास दर्ज थे। जब SIT बंद हुई, तो 923 प्रकरणों का बंटवारा कर जोन स्तर पर उपायुक्तों को जांच सौंप दी गई। उस समय यह दावा किया गया था कि SIT की तर्ज पर ही इन प्रकरणों की जांच की जाएगी। इस बात को करीब तीन से चार महीने बीत चुके हैं, मगर 923 में से एक भी प्रकरण की जांच पूरी करने में पुलिस सफल नहीं हुई है। इससे प्रकरणों की जांच संदेह के घेरे में आ गई है। अब दबी जुबान यह कहा जा रहा है कि अघोषित तौर पर प्रकरणों की जांच ही बंद हो गई है या यू कहें कि प्रकरणों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।



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