नागपुर सहित देश भर में सड़कों पर उतरी आंगनवाड़ी और आशा वर्कर


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    नागपुर सहित देश भर में सड़कों पर उतरी आंगनवाड़ी और आशा वर्कर
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नागपुर : देश भर में बुधवार को लाखों आंगनवाड़ी, मिड-डे-मिल और आशा वर्कर हड़ताल पर रही I सम्पूर्ण देश सहित महाराष्ट्र और जिला में भी इस हड़ताल का असर देखने को मिला नागपुर के संविधान चौक पर जिला भर से हजारों की संख्या में आई आंगनवाड़ी कार्यकर्ताएं, मिड-डे-मिल और आशा वर्करों ने सीटू के बैनर तले धरना प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की, यह सभी खुद को सरकारी कर्मचारी घोषित करवाने की मांग कर रही हैं I 

इनका कहना है कि 2013 में हुए श्रम सम्मेलन में इनके हक में जिन सिफारिशों को भारत सरकार ने माना था, उन्हें आज दिन तक लागू नहीं किया गया है. इन्होंने भारत सरकार और राज्य सरकारों से इन सिफारिशों को लागू करवाने की मांग उठाई है I 

इन्होंने मांग उठाई है कि आंगनबाड़ी, मिड-डे-मिल और आशा वर्करों को वेतनभोगी बनाकर सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए, जब तक सरकार ऐसा नहीं करती है तब तक उन्हें मानदेय और सुविधाएं देने की व्यवस्थाएं की जाएं I वहीं, इन्होंने एनआरएचएम के तहत इनके लंबित पड़ी अदायगी को भी जल्द से जल्द अदा करने की गुहार लगाई है, साथ ही इनका कहना है कि सभी वर्करों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन और ग्रेचुटी की सुविधा दी जाए और निजीकरण की प्रथा को बंद किया जाए I 

मानधन बढ़ाने की मांग को लेकर आंगनवाड़ी सेविकाआें ने पिछले साल 11 सितंबर से 6 अक्टूबर (26 दिन) तक पूरे महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी बंद रखी तब  नागपुर से शुरू हुआ संघर्ष मुंबई तक पहुंचा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आगे आकर हड़ताल खत्म कराई थी। आंदोलनकारियों की मांगों को मानने का आश्वासन सरकार की तरफ से दिया गया था। सेविकाआें के मानधन में तुरंत 1500 रुपए व मददनीस की मानधन में 1000 रुपए की वृद्धि करने आैर भाऊबीज की राशि एक हजार से बढ़ाकर दो हजार करने का निर्णय लिया गया था। साथ ही बजट सत्र के पहले बैठक लेकर मानधन में स्थाई वृद्धि करने का भरोसा दिया गया था किन्तु तीन महीने बीत गए, लेकिन न मानधन बढ़ा, न भाऊबीज की बढ़ी हुई राशि मिली। आंगनवाड़ी सेविका व मददनीसों ने आशा वर्करों व शालेय पोषण आहार की आपूर्ति करने वालों के साथ हड़ताल करने का निर्णय लिया गया । आशा वर्करों को फिलहाल प्रति केस पर मानधन मिलता है। इनकी मांग हर महीने १८,००० निश्चित मानधन देने की है। इसी तरह शालेय पोषण आहार पहुंचाने वाले कमिशन बढ़ाने से लेकर हर महीने बिल का भुगतान करने की मांग कर रहे हैं । देश भर के 11 श्रम संगठनों ने इन्हें अपना समर्थन जाहिर करते हुए आंदोलन में शामिल होकर हड़ताल को सफल किया I   



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