डाक विभाग ने चलन पहुंचाकर एक साल में कमाए ६२ लाख


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    डाक विभाग ने चलन पहुंचाकर एक साल में कमाए ६२ लाख
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नागपुर : डाक विभाग जो की अब बहुत कम लोगो के लिए काम में आनेवाली सेवा है, कारण बढ़ते टेक्नोलॉजी के चलते हर व्यक्ति के पास मोबाईल, इंटरनेट और फेसबुक ने इस सेवा को कम कर दिया है I लेकिन डाक विभाग फिर से राजस्व कमा रहा है क्यों की राज्य में ऑनलाइन चालान सिस्टम शुरू होने के बाद अकेले डाक विभाग नागपुर ने एक साल में कमीशन के रूप में 62 लाख रुपए का राजस्व कमाया है । अब यातायात पुलिस का ऑनलाइन सिस्टम डाक विभाग के लिए राजस्व प्राप्त करने का जरिया बन गया है। डाक विभाग को एक डाक पहुंचाने पर 5 से 20 रुपए तक का कमीशन यातायात पुलिस विभाग की तरफ से मिलता है।

नागपुर यातायात पुलिस विभाग ने नवंबर 2016 को शहर में ऑनलाइन चालान सिस्टम शुरू किया था । यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों का फोटो निकालकर चालान की कॉपी उनके घर पहुंचाई जाती है। फोटो निकालने का काम यातायात पुलिस के जवान करते हैं आैर वाहन चालकों के घर चालान कापी पहुंचाने का काम डाक विभाग के डाकिए करते हैं।

डाक विभाग को दिसंबर 2016 से नवंबर 2017 यानी एक साल में चालान कॉपियां पहुंचाकर (होम डिलीवरी) कमीशन के रूप में 62 लाख रुपए का राजस्व मिला। डाक विभाग को यह कमीशन यातायात पुलिस विभाग की तरफ से मिला। चालान की कॉपी घर पहुंचने पर संबंधित व्यक्ति को चालान (जुर्माना) राशि डाक कार्यालय में जमा करनी पड़ती है। तय समय में जुर्माना राशि डाक कार्यालय में जमा नहीं करने पर यातायात पुलिस संबंधित व्यक्ति के खिलाफ न्यायालयीन कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है। डाकिए के माध्यम से जितने चालान वाहन चालकों के घर पहुंचाए (होम डिलीवरी) गए, उसे बहुत अच्छा प्रतिसाद मिला है। देखने में आया है कि चालान घर पहुंचने पर 95 फीसदी लोगों ने डाक कार्यालय में जुर्माना राशि जमा की। बचे हुए 5 फीसदी मामलों में कुछ कोर्ट पहुंचे आैर कुछ मामलों में वाहन मालिक वाहन किसी अन्य को बेच चुका है। कुछ ऐसे भी बिरले मामले हैं, जिसमें किसी का चालान किसी दूसरे के नाम से बन गया। 



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