अभी तक ९ आरोपी गिरफ्तार नहीं हुवे बाघ शिकार प्रकरण में - जाँच करनेवाले दो अधिकारियो का तबादल


  • अभी तक ९ आरोपी गिरफ्तार नहीं हुवे बाघ शिकार प्रकरण में - जाँच करनेवाले दो अधिकारियो का तबादल
    अभी तक ९ आरोपी गिरफ्तार नहीं हुवे बाघ शिकार प्रकरण में - जाँच करनेवाले दो अधिकारियो का तबादल
    1 of 1 Photos

नागपुर : भारत में बाघ को राष्ट्रीय प्राणी का दर्जा दिया है जिससे बाघ की शिकार करना अपराध माना जाता है और उसके अंगो की तस्करी करना भी बहुत बड़ा अपराध है इसके बावजूद भी बाघ के अंगों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मांग है और इसकी काफी अधिक मोटी रकम भी मिलती हैं । इसी वजह से विदर्भ के जंगल क्षेत्र में  बाघ के शिकारी और तस्करों की नजरें हमेशा टिकीं रहती हैं । मौका देखकर बाघ का शिकार कर लिया जाता हैै जिससे कुछ महीनो पहले बाघ की हड्डियों, नाखूनों और अन्य अवयवों को बेचते हुए वन विभाग की टीम ने जाल बिछाकर आरोपियों को पकड़ा था। शुरुआत में 4 आरोपी पकड़े गए थे । पूछताछ के बाद आरोपियों की संख्या 17 तक जा पहुंची थी, किन्तु अब भी 9 आरोपी गिरफ्त से बाहर हैं। जिससे बाघों के अवयवों की मांग करनेवाले मुख्य आरोपियों के नाम का अभीतक पता नहीं लग पाया । इन सारे प्रकरण के लिए जो जांच टीम बैठाई गई थी, उसके दोनों अधिकारियों को वन विभाग ने तबादला कर मामले से दूर किया है । 

प्राप्त सूत्रों के अनुसार पवनी रेंज के वन परिक्षेत्र अधिकारी पांडुरंग पखाले को पहले ही विभाग ने किसी प्रशिक्षण के नाम पर दो माह के लिए देहरादून भेज दिया है। इससे मामले की जमीनी स्तर पर जांच आगे बढ़ने की रफ्तार आधी हो गई थी, वहीं नागलवाड़ी रेंज परिक्षेत्र के अधिकारी गावंडे का हाल ही में कलमेश्वर रेंज में तबादला कर दिया गया है । जिससे जांच की दिशा पर सवाल खड़े होने लगे हैं । 

मामले की जांच अधिकारी गीता नन्नावरे से संपर्क करने पर उन्होंने भी मामले की जांच में प्रगति नहीं होने की बात बताते हुए कहा कि 13 नवंबर को रामटेक जेएमएफसी ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। इस बीच आरोपियों ने हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत को जारी रखा। वन विभाग ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी करने के लिए 30 दिसंबर तक मोहलत मांगी है। हालांकि 1 जनवरी से इस जांच में तेजी आने की उम्मीद है। जाहिर है ऐसी स्थिति में जांच प्रक्रिया को लेकर लगाए जानेवाले आरोप-प्रत्यारोप का दौर और गर्म हो गया है। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जांच में अधिकारियों का ऐसा हश्र होने से आगे ऐसे मामलों से अधिकारी बचने की कोशिश करेंगे, जिससे आगे वन्यप्राणी के संरक्षण में ढिलाई देखे जाने की भूमिका बनी रहेगी I  



add like button Service und Garantie

Leave Your Comments

Other News Today