बाघों आसान और अचूक गणना के लिए ‘क्षेत्र ग्रिड’


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    बाघों आसान और अचूक गणना के लिए ‘क्षेत्र ग्रिड’
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नागपुर : प्रशासन को बाघों की सटीक गणना के लिए इस बार "क्षेत्र ग्रिड" मददगार साबित होनेवाला है । उल्लेखनीय है कि बाघों की राष्ट्रीय गणना 2018 की शुरुआत हो चुकी है । सितंबर-अक्टूबर में प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने के बाद गणना के पहले पड़ाव की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इस बार बाघों की गणना की प्रक्रिया में और सुधार करते हुए गणना को और सटीक बनाने के लिए प्रत्येक ग्रिड का आकार घटाया गया है।

वन विभाग सूत्रों के अनुसार बाघों की गणना के लिए पहले कुल क्षेत्र का आकार 4 वर्ग किलोमीटर का रखा जाता था, किन्तु इस बार की राष्ट्रीय बाघ गणना के आंकड़ों को और सटीक बनाने के लिए ग्रिड का आकार 4 वर्ग किलोमीटर से घटाकर 2 वर्ग किलोमीटर रखा जाने की जानकारी है । इससे बाघों की गणना में सही आकड़ो की गिनती आएगी। इस राष्ट्रीय स्तर की गणना के लिए ग्रिड का आकार घटाने से गणना में कर्मचारियों की संख्या भी अधिक लगेगी लेकिन  नियोजित ढंग से पूरा करने की तैयारी कर ली गई है। 

नियमानुसार हर चार साल में देश में बाघों की गिनती की जाती है। 2014 में बाघ गणना के बाद 2018 में इस राष्ट्रीय अभियान को पूरा करने के लिए पहले चरण की शुरुआत सितंबर-अक्टूबर में की गई थी, जिसमें ट्रेनरों को प्रशिक्षित किया गया । पहले चरण में 10 दिन के प्रोटोकॉल की तैयारी के साथ फरवरी अंत तक पहले चरण की सैम्पलिंग पूरी कर ली जाएगी। अप्रैल 2018 अंत तक डाटा सैम्पलिंग नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान को पेश की जाएगी ।  तीसरे और चौथे चरण की सैम्पलिंग की तैयारी नवंबर माह से ही शुरू हो गई थी, जो नवंबर 2018 तक चलेगी । इस दौरान कैमरा ट्रैप लगाने से लेकर गणना तक की जाएगी बाद में डाटा एंट्री का कार्य दिसंबर 2018 तक चलेगा। वहीं डाटा विश्लेषण मई 2018 से शुरू होकर फरवरी 2019 तक चलेगा और अंत में रिपोर्ट मार्च 2019 तक पेश करने की जिम्मेदारी वन विभाग करेगा I 



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