एड्स के बारे में समाज में जागरूकता हो - डॉ. नितिन शिंदे


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नागपुर : दुनिया की सबसे बड़ी बीमारी एड्स के लिए लोगो में जागरूकता बढ़ाने और दुनिया भर में इस बीमारी से लडऩे के लिए संगठित होने की आवश्यक है I  विश्व एड्स दिवस उन लोगों के लिए है जो एड्स के साथ जीते हैं और एड्स के कारण जिनकी मृत्यु हुई है, उन लोगों को याद करने के लिए है, ऐसा प्रतिपादन डॉ. नितिन शिंदे ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में व्यक्त किए.डॉ. नितिन शिंदे ने एड्स के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि विश्व एड्स दिवस को मनाने का महत्वपूर्ण कारण ये है कि इस बीमारी के खिलाफ एचआईवी ग्रस्त मरीजों की हिम्मत बढ़ाना है. विश्व स्तर पर, 36.7 मिलियन लोग हैं, जो एचआईवी से ग्रस्त हैं. 1984 में इस वायरस की पहचान हुई थी. इस बीमारी से करीब 35 मिलियन लोगों की अब तक मौत हुई है. फिलहाल एचआईवी ग्रस्त 54 प्रतिशत वयस्क और 43 प्रतिशत बच्चे तथा एचआईवी से ग्रस्त गर्भवती और स्तनपान कराने वाली 76 प्रतिशत महिलाएं आजीवन एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) ले रही हैं I 

उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि एचआईवी किस प्रकार लोगों को प्रभावित करता है. 'ज्यादातर सेक्स वर्कर और उनके ग्राहकों, पुरुषों, जो पुरुषों के साथ यौन संबंध रखते हैं, जो लोग ड्रग्ज, इंजेक्शन लेते हैं तथा जेल या बंदी बनाये लोगों में और किन्नरों में एड्स होने की संभावना होती है. यदि आप एचआईवी पर उपाय मांगते हैं, तो इसका उत्तर 'नहीं है. एंटी रेट्रोवायरल दवाइयां वायरस को नियंत्रित करती हैं और उसे फैलाने से रोकती हैं. इन दवाइयों का नियमित सेवन करने से एचआईवी ग्रस्त मरीज सामान्य जीवन जी सकता है I उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का दीर्घकालिक विचार एड्स नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है. यूएनएड्सकार्यक्रम का उद्देश्य शून्य नए एचआईवी संक्रमण, शून्य भेदभाव और शून्य एड्स से मौत है. "माय हेल्थ माय राइट" नामक अभियान की शुरुआत 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस पर की जा रही है. इसमें दुनिया भर के लोग अपने अधिकारों का उपयोग करते समय आने वाली कठिनाइयों का अध्ययन करेंगे I 



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